भ्रम
उन आँखों में चाहत की इक लकीर तो दिखी थी,
बहुत गहरी नहीं...हलकी सी खिंची थी,
था मेरा भ्रम या था ये हकीकत,
सोचा नहीं कभी ये उस वक़्त...
है बिलकुल अलग आज की सच्चाई,
मगर मिटी नहीं है कल की परछाई...
झेलकर हमने ज़माने की रुसवाई...
वो झीनी हसीं महक है पाई....
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