आज कि शाम अचानक हो उठी है उदास
जाने कहाँ से जगी है कैसी है ये प्यास!
दिल के किस कोने में छुपी थी ये निराशा
जाने क्यूँ महसूस कर रहा हूँ खुद को आज प्यासा.
न दिल में है कुछ अहसास
न ही दिमाग में कोई चक्रवात
मगर लव चाहते हैं कुछ कहना
ऑंखें चाहती हैं थोडा बरसना
हालाँकि पूछना चाहता हूँ एक सवाल
ढूँढता हूँ दिल में- क्या है ख्याल
खोजने कि कोशिश करता हूँ बार-बार
लेकिन शायद ये कोशिश भी नहीं है ईमानदार
क्यूँ हो रहा है आज ऐसा
कैसे बताऊँ- हल है मेरा कैसा
महसूस कर रहा हूँ किसी कि कमी
आखिर ... आँखों में आ ही गयी नमी....